शिलाजीत का अर्थ, उत्पत्ति और स्वरूप पर्वतों का विजेता और दुर्बलता का नाशक


 

शिलाजीत का अर्थ, उत्पत्ति और स्वरूप

पर्वतों का विजेता और दुर्बलता का नाशक

 शिलाजीत (Sanskrit: शिलाजीत) शब्द संस्कृत मूल का है, जिसका अर्थ है
 
पर्वतों का विजेता और दुर्बलता का नाशक,
तथा इसेशिलाजेतायाशिलारसभी कहा गया है।

अंग्रेज़ी में इसके विभिन्न नाम हैं
Shilajit, Silajit, Silaras, Mumiyo, Mineral pitch, Asphalt, Jew’s pitch, Mineral wax
या Ozokerite हिन्दी में इसे शिलाजीत, शिलाजी, या सलाईजित भी कहा जाता है।

यह एक काले-भूरे रंग का गाढ़ा, चिपचिपा पदार्थ है जो विभिन्न पर्वतीय चट्टानों की दरारों, गुफाओं की दीवारों और पत्थरों के भीतर से स्वाभाविक रूप से निकलता है। यह हिमालय की ऊँचाइयों (1000–5000 मीटर) के बीच, अरुणाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर तक पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, चीन, तिब्बत और रूस के पहाड़ी क्षेत्रों में भी मिलता है।

शिलाजीत का निर्माण कैसे होता है

यह अद्भुत औषधीय पदार्थ दरअसल हजारों-लाखों वर्षों तक पर्वतीय परतों में फँसे पौधों और जैविक पदार्थों के विघटन (decomposition) से बनता है। गर्मियों में तीव्र गर्मी और सर्दियों में अत्यधिक ठंडइन दोनों की चरम स्थितियों तथा पर्वतों के भारी दबाव के कारण यह खनिजों से भरपूर द्रव्य चट्टानों से बहकर बाहर निकलता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि शिलाजीत में फुल्विक अम्ल (Fulvic acid) जैसे महत्वपूर्ण जैविक तत्व होते हैं। अनुसंधान बताते हैं कि यह पदार्थ Euphorbia royleana और Trifolium repens जैसी वनस्पतियों के धीमे जैविक अपघटन से बनता है। यह प्रक्रिया सदियों तक चलती रहती है, इसलिए इसे प्रकृति की सहस्राब्दियों पुरानी देन (Millenary Product of Nature) माना जाता है।

हाल के अध्ययनों से यह भी ज्ञात हुआ है कि Barbula, Fissidens, Minium, Thuidium, Asterella, Dumortiera, Marchantia, Pellia, Plagiochasma, Stephenrencella-Anthoceros जैसी अन्य शैवाल (mosses) और पौधीय जीव भी इसके निर्माण में योगदान करते हैं।

यदि सरल भाषा में कहा जाए, तो शिलाजीत वही प्रक्रिया है जैसे हम सब्ज़ी या फलों के कचरे से जैविक खाद या कम्पोस्ट बनाते हैंबस यहाँ यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से पर्वतीय दबाव और सूक्ष्म जीवों की क्रिया से करोड़ों वर्षों में होती है।

शिलाजीत का स्वरूप और गुण

शिलाजीत एक अत्यंत सुरक्षित और शक्तिशाली प्राकृतिक पूरक (Natural Dietary Supplement) है, जो शरीर की ऊर्जा, संतुलन और प्रतिरोधक क्षमता को पुनर्स्थापित करता है।
नवीनतम अनुसंधान बताते हैं कि यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने, स्मरण शक्ति सुधारने, तथा बुढ़ापे से जुड़ी संज्ञानात्मक (cognitive) बीमारियों को रोकने में सहायक है।

संक्षेप में कहा जाए तो
👉
शिलाजीत एक शक्तिशालीन्यूट्रास्यूटिकल” (Nutraceutical) है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए सिद्ध लाभ प्रदान करता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से संरचना

शिलाजीत में मुख्य रूप से ह्यूमिक पदार्थ (Humic substances) पाए जाते हैं, जिनमें फुल्विक अम्ल (Fulvic acid) लगभग 60%–80% तक होता है।
इसके साथ इसमें सूक्ष्म खनिज तत्व (Oligoelements) जैसे सेलेनियम (Selenium) पाए जाते हैं, जो एंटी-एजिंग गुण रखते हैं।

ये सभी पदार्थ पौधीय तत्वों के सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटन का परिणाम हैं।
ह्यूमिक पदार्थ तीन प्रकार के माने जाते हैं

  1. ह्यूमिन्स (Humins)
  2. ह्यूमिक एसिड (Humic Acid)
  3. फुल्विक एसिड (Fulvic Acid)

ह्यूमिक और फुल्विक अम्ल दोनों ही जल में घुलनशील होते हैं और आंत्र मार्ग (Intestinal Tract) से आसानी से अवशोषित होकर कुछ ही घंटों में शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, शिलाजीत की औषधीय क्रियाएँ मुख्यतः फुल्विक अम्ल के कारण होती हैं, क्योंकि यह एक शक्तिशाली ऑक्सीडेंट विरोधी (Antioxidant) हैजिसकी क्रिया नोनी (Noni) और ब्लूबेरी जैसे प्रसिद्ध पोषक पदार्थों से भी अधिक प्रभावी मानी गई है।

अन्य रासायनिक घटक

शिलाजीत में निम्नलिखित तत्व भी पाए जाते हैं

  • एलैजिक अम्ल (Ellagic acid)
  • वसा अम्ल (Fatty acids)
  • रेज़िन, लेटेक्स और गोंद
  • ट्राइटरपीन, स्टेरॉल्स, एरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल
  • बेंज़ोकौमैरिन्स (3,4-Benzocoumarins)
  • अमीनो अम्ल, पॉलीफिनॉल्स और फिनोलिक लिपिड्स

नवीनतम परीक्षणों (HP-SEC chromatography) में यह भी पाया गया है कि शिलाजीत में विशिष्ट पॉलीसैकराइड्स (Polysaccharides) और लिग्निन (Lignins) उपस्थित हैं। यह प्राचीन औषधीय पदार्थ 84 से अधिक खनिजों (जैसे तांबा, लोहा, जस्ता) से भरपूर है और मधुमेह, हीमोग्लोबिन की कमी, मानसिक तनाव, यौन दुर्बलता, अल्ज़ाइमर, मूत्र रोगों और ऊँचाई पर होने वाली बीमारियों में लाभकारी सिद्ध हुआ है।

संक्षेप में


शिलाजीत, हिमालय की गोद से प्राप्त यह काला-भूरा राल सदृश द्रव्य, प्रकृति का जीवंत टॉनिक है
जो शरीर को ऊर्जा, बल, सहनशक्ति और दीर्घायु प्रदान करता है।
कड़वा स्वाद होने के बावजूद, इसके स्वास्थ्य लाभ अमृत के समान मधुर हैं।

 

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